Monday, August 11, 2008















बहुत अरसे बाद..इक दोस्त के आग्राह पर पुनः लिखने का प्रयास॥








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"रंग मिला..
दम मिला..
तेरी बज्म से..

रूह सुलगती थी..
साँसें मचलती थी..
तेरी नज़्म से..

इनायत कूचे की..
याद रहेगी उम्र-भर..!"

...


शुक्रिया..उत्साहित करने के लिए रजिथा..

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