Pourng heart out after agez..
Herezz smthng written recently...
...
"सुकूँ..तेरे बज्म में काश मिल जाता..
फ़क़त..मैं भी यूँ ही मशहूर हो जाता..१
रंजिश ना रहती खुद से फिर कोई..
तेरे दामन में..जब मसरूफ हो जाता..२
फिजायें दुआ देतीं..साहिल समा बांधता..
गुल खिलने को..सेहरा में मजबूर हो जाता..३
दरखत सुनते थे सलीका शोरिदगी का..
मिजाज़ जवानी का..मगरूर हो जाता..४..!"
...
*शोरिदगी = दीवानगी..
Time running out..!
Sunday, June 29, 2008
Subscribe to:
Posts (Atom)
